यदि किसी व्यक्ति ने सिर्फ अपनी जबान से मन्नत के शब्द कहे दिल में उसके मन्नत मानने का इरादा बिल्कुल भी नहीं था तब भी मन्नत लागू हो जाएगा नजर और मन्नत के लागू होने के लिए दिल का इरादा जरूरी नहीं है सिर्फ जबान से मन्नत और नजर के शब्द का सही तौर पर कह देना ही काफी है उसी से नजर लागू हो जाता है(वल्लाहु आलम)
(मुस्तफाद: फतावा दारुल उलूम देवबंद
फतावा शामी पार्ट नंबर5 पेज
नंबर479
हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
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