यदि किसी ने मन्नत मानी कि मैं उदाहरण के तौर पर अल्लाह के लिए जानवर जिबह करूंगा तो ख्वाब में मानी गई मन्नत का शरई तौर पर पूरा करना हकीकी जिंदगी में लाजिम नहीं है हां अगर वह अपने अधिकार से उसे पूरा करे या सदका करे तो दुरुस्त है
(वल्लाहु आलम)
मुस्तफाद: फतावा बिननौरया
फतावा हककानिया पार्ट नंबर 2 पेज नंबर 272 मिरकात पाठ नंबर 9 पेज नंबर 358
हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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