मन्नत के जानवर का गोश्त और उससे पकाया गया खाना मन्नत मानने वाले और उसके घर वाले अर्थात मां बाप दादा दादी बेटे बेटी वगैरा और मालदार लोग नहीं खा सकते बल्कि वह खाना गरीब लोगों को खिलाना जरूरी है.
(वल्लाहु आलम)
मुस्तफाद: इमदादुल फतावा
फतावा शामी पार्ट नंबर3 पेज नंबर 283
हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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