मन्नत में खैरात की रकम निश्चित नहीं की तो क्या हुकुम है

यदि किसी ने मन्नत मानी कि मेरा काम हो गया तो सबका करूंगा लेकिन सदके में रकम निश्चित नहीं किया तो अगर उसके दिल में कुछ ख्याल था कि मैं इतनी रकम सदका करूंगा या इतना गल्ला सदका करूंगा तो उसी प्रकार से अदा कर दे वरना जितना एक सदकए फित्र में दिया जाता है उतना देना लाजिम है
(वल्लाहु आलम)
मुस्तफाद: फतावा कासमिया
फतावा शामी पार्ट नंबर 3 पेज नंबर 318
हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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