हर ऐसी नज़्म (कविता) तराना या गीत जिसमें कुफ्रो- शिर्क वाले अल्फाज़ हों? ऐसे तरानों, गीत या नज़्म का पढ़ना जायज़ नहीं है, फिर जिस कविता या शेरो-शायरी में किसी की बुराई बयान की जाए, या खामखा की तारीफ की जाए तो वह गीत या तराने चाहे राष्ट्रीय हों या गैर राष्ट्रीय, उनका पढ़ना भी
सही नहीं है।
हां वैसे जिस गीत या तराने में कुफरिय्या शिरकिय्या अल्फाज़
न हों, ऐसे ही उसमें झूठ, किसी की बुराई या झूटी तारीफ न हों तो उसका पढ़ना जायज़ है।
और जन गण मन” तराने में ऐसे अल्फाज़ नहीं हैं जिन्हें शिरक कहा जाए, लिहाजा इसे पढना दुरुस्त है।
(वल्लाहु आलम)
(मुस्तफाद:आपके मसाइल और उनका हल 8/488)
शामी 2/433) सूरह-शुअरा 224) तफसीर नसफी 2/588)
नाकिल✍हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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