शबे बरात या शबे कदर की कसम खाना

इस्लाम में अल्लाह के अलावा की कसम खाना जायज नहीं है और ऐसी कसम लागू भी नहीं होती है इसलिए यदि अगर किसी ने शबे बरात या सबे कदर की कसम खाई तो कसम लागू नहीं होगी उदाहरण के तौर पर किसी ने कसम खाई के शबे बरात या सबे कदर की कसम मैं वह काम नहीं करूंगा फिर वह कर लेता है तो उस पर कफफारा लाज़िम नहीं होगा
लेकिन चूंके उसने अल्लाह के अलावा कि कसम खाकर एक नाजायज काम किया है इसलिए उससे तोबा करना वाजिब है।.
(वल्लाहु आलम)
(मुस्तफाद: फतावा दारुल उलूम देवबंद
फतावा शामी पार्ट नंबर 5 पेज नंबर 484
नाकिल✍हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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