यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर कसम के बजाय खसम कहता है और उससे उसका इरादा कसम खाने का नहीं है इसीलिए वह कसम के शब्द को बिगाड़ कर बोल रहा है तो कसम लागू नहीं होगी लेकिन धोखा देने के लिए या झूठ को छुपाने के लिए या अल्लाह के नाम की कसम को मामूली समझते हुए इस तरह कर रहा है तो यह नाजायज और हराम है लेकिन अगर कसम खाने के इरादे से ऐसा बोलता है लेकिन गलत शब्द उसके मुंह से निकल जाता है या शब्द का उसके इलाके में ऐतबार नहीं किया जाता तो फिर कसम लागू हो जाएगी।
(वल्लाहु आलम)
(मुस्तफाद: फतावा कासमिया
फतावा शामी पार्ट नंबर3 पेज नंबर 704
नाकिल✍हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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