झंडे अर्थात कौमी परचम के सामने खड़ा होना या उसे सलामी यानी सेल्यूट पेश करना एक कॉमी या फौजी काम है और यह इस्लामी और गैर इस्लामी और जम्हूरि हर मुल्क में होता है लिहाजा ऐसा करने की इजाजत है।(वल्लाहु आलम)
(मुस्तफाद: फतावा दारुल उलूम देवबंद
फतावा शामी पार्ट नंबर6पेज नंबर 383
नाकिल✍हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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