जिस तरह नकद खरीद-फरोख्त करना जायज है इसी तरह उधार सौदा करना भी जायज है लेकिन शर्त यह है के मामला करते वक्त कोई एक कीमत तय कर ली जाए और उधार की तिथि भी मुकर्रर कर ली जाए यदि उस तारीख से पहले अदा कर देता है तो कीमत में किसी किसिम की कोई कमी की शर्त ना हो और इसी तरह उस तारीख के बाद अगर उसके पैसे अदा करता है तो भी कीमत में किसी किसिम की ज्यादती की शर्त ना हो यदि इन शर्तों के साथ उधार खरीद-फरोख्त की जाए तो जायज है वरना वह ब्याज के हुकुम में होगा और नाजायज और हराम होगा।.
(वल्लाहु आलम)
(मुस्तफाद: फतावा दारुल उलूम देवबंद
फतावा शामी पार्ट नंबर3 पेज नंबर41-42
नाकिल✍हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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