सदके के बकरे सदका देने वालों की कसी तरह की इजाजत के बगैर उसको फरोख्त करना जायज नहीं है और अगर मालूम हो की यह शख्स सदके का जानवर बेच रहा है तो ऐसे जानवर को लेना भी दुरुस्त नहीं है। और अगर सदका देने वालों की तरफ से इजाजत होती हो के बकरा फरोख्त करके पैसे जरुरियात में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।तो उनको फरोख्त करना और उसका खरीदना भी जायज है।
(वल्लाहु आलम)
(मुस्तफाद: फतावा दारुल उलूम देवबंद
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नाकिल✍हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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