मन्नत में खैरात की रकम निश्चित नहीं की तो क्या हुकुम है
यदि किसी ने मन्नत मानी कि मेरा काम हो गया तो मैं सदका करूंगा लेकिन सदके में रकम निश्चित नहीं किया तो अगर उसके दिल में कुछ ख्याल था कि मैं इतनी रकम सदका करूंगा या इतना गल्ला सदका करूंगा तो उसी प्रकार से अदा कर दे वरना जितना एक सदकए फित्र में दिया जाता […]
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