शेर की खरीद-फरोख्त जायज है क्योंकि उसको सधाना भी मुमकिन है और उसकी खाल से फायदा भी उठाया जाता है और बंदर के बारे में इमाम अबू हनीफा रहमतुल्लाहि अलेहि से दो रिवायत है जायज और नाजायज दोनों का लिहाजा दोनों पर अमल किया जा सकता है अगर कोई खरीदना चाहता है या बेचना चाहता है तो एक रिवायत के मुताबिक उसे हराम नहीं कहा जाएगा। अलबत्ता एहतियात बेहतर है।
(वल्लाहु आलम)
(मुस्तफाद: फतावा बिन्नौरिया
???? *.फतहुलकदीर पाठ नंबर 7 पेज नंबर 118*????
नाकिल✍हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
???? नोट. अधिक जानकारी हेतु संपर्क भी कर सकते हैं।
☎ CONTAT.NO +916206649711
????????????????????????????????????????????????