सिर्फ किसी व्यक्ति के कसम देने से कसम लागू नहीं होती है जैसे किसी ने कहा कि अल्लाह की कसम तुम यह काम जरूर करोगे या उदाहरण के तौर पर अपने बच्चे या दूसरे के बच्चे की कसम दी तो ऐसी कसम लागू तो नहीं होती है मगर ऐसा कहना शरीअत में नाजायज और हराम है इस लिए ऐसी सूरत में कोई भी कसम लागू नहीं हुई और उसके खिलाफ करने से ना कोई कफ्फारा वाजिब होगाऔर ना बच्चे को किसी को
किसम का नुक़सान होगा इंशाल्लाह।.
(वल्लाहु आलम)
(मुस्तफाद: फतावा दारुल उलूम देवबंद
फतावा शामी पार्ट नंबर5 पेज नंबर 488
नाकिल✍हिदायतुल्लाह
खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार
HIDAYATULLAH
TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA
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