احکام ومسائل

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فہرست


1. قربانی سے متعلق مسائل

2. قربانی کے جانور سے متعلق مسائل

3. ذبح سے متعلق مسائل


हुजूर सल्लल्लाहू अलेहि वसल्लम की कसम खाना

यदि कभी कोई वाकिया या कोई ऐसी जरूरत सामने आ जाए जहां कसम खाए बिना कामना चल सकता हो तो ऐसी मजबूरी के मौके पर सिर्फ अल्लाह की कसम खानी चाहिए हुजूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की कसम खाना जायज नहीं है औलमा इकिराम ने उससे मना फ़रमाया है। (वल्लाहु आलम) (मुस्तफाद: फतावा दारुल उलूम देवबंद […]

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اللہ کے رسول صلی اللہ علیہ وسلم کی قسم کھانا

اگر کبھی کوئی واقعہ یا کوئی ایسی ضرورت پیش آجائے جہاں قسم کھائے بنا کام نہ چل سکتا ہو تو ایسی مجبوری کے موقع پر صرف اللہ کی قسم کھانی چاہیے آپ صلی اللہ علیہ وسلم کی قسم کھانا جائز نہیں ہے فقہاء نے اس سے منع فرمایا ہے۔ واللہ اعلم بالصواب۔ (مستفاد: فتاوی دارالعلوم

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क्या मन्नत के रोजे लगातार रखना जरूरी है

यदि किसी ने मन्नत मानी कि मेरा फुलां काम हो गया तो मैं 10 रोजे रखूंगा तो अगर उसने मन्नत मांनते वक्त लगातार रोजा रखने की नियत की थी तो उसे 10रोजे लगातार रखने होंगे और यदि उसने नियत नहीं की थी तो अलग-अलग भी रोजे रख कर के नजर पूरी की जा सकती है.

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قسم توڑنے کا کفارہ

قسم کا کفارہ یہ ہے کہ دس مسکینوں کو دو وقت کا کھانا کھلا دے یا دس مسکینوں میں سے ہر ایک کو صدقۃ الفطر کی مقدار کے بقدر گندم یا اس کی قیمت دے دے( یعنی پونے دو کلو گندم یا اس کی رقم )اور اگر جو دے تو اس کا دو گنا (تقریباً

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कसम तोड़ने का कफ्फारा

कसम तोड़ने का कफफारा यह है कि 10 गरीबों को दो टाइम का खाना खिला दे या 10 गरीबों को एक एक जोड़ा कपड़ा पहना दे और अगर कोई ऐसा गरीब है कि ना तो खाना खिला सकता है और ना कपड़े पहना सकता है तो मुसलसल 3 रोजे रखे (वल्लाहु आलम) (मुस्तफाद: फतावा बिननौरया

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मन्नत मांगने के बाद बकरा गुम होजाने का हुकुम

यदि किसी ने किसी काम के पूरा होने पर बकरा सदका करने की मन्नत मांनी और काम पूरा हो गया लेकिन बकरा गुम हो गया तो अब उसका हुकुम यह है कि यदि उसने बकरा मुतअययन करके उसको सबका करने की मन्नत मांनी थी और वह गुम हो गया तो अब वह मन्नत खत्म हो

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अल्लाह के रास्ते में रकम देने की नजर मानना और उसके खर्च करने की जगह

यदि किसी ने मन्नत मानी के यदि मेरी मुराद पूरी हो जाएगी तो मैं अल्लाह के रास्ते में उदाहरण के तौर पर ₹500 दूंगा तो यह रकम किसी जकात के रकम के हकदार शख्स को देना होगा नजर की रकम किसी मालदार को देना जायज नहीं है इसी तरह से अपने मां-बाप को अपनी औलाद

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بکرے کی نذر مانی تھی لیکن غلطی سےبکری خریدی گئی تو کیا حکم ہے

اگر کسی شخص نے نذر مانی کہ اگر میرا کام ہوگیا تو میں ایک بکراذبح کروں گا لیکن جب خریدنے گیا تو غلطی سے یا جان بوجھ کر بکرا کی جگہ بکری آگئی تو کوئی حرج نہیں ہے بکری سے بھی نذر پوری ہو جائے گی۔واللہ اعلم بالصواب۔ (مستفاد: فتاوی قاسمیہ فتاویٰ بزازیہ جلد نمبر

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बकरे की मन्नत मानी थी लेकिन गलती से बकरी खरीदी गई तो क्या

यदि किसी व्यक्ति ने मन्नत मानी के यदि मेरा काम पूरा हो गया तो मैं एक बकरा जबह करूंगा फिर जब बकरा खरीदने गया तो गलती से या जानबूझकर बकरी ले आया तो उससे भी मन्नत पूरी हो जाएगी और बकरे की जगह बकरी को जबह करने में कोई हर्ज नहीं है (वल्लाहु आलम) (मुस्तफाद:

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सपना में मन्नत मानने का हुकुम

यदि किसी ने मन्नत मानी कि मैं उदाहरण के तौर पर अल्लाह के लिए जानवर जिबह करूंगा तो ख्वाब में मानी गई मन्नत का शरई तौर पर पूरा करना हकीकी जिंदगी में लाजिम नहीं है हां अगर वह अपने अधिकार से उसे पूरा करे या सदका करे तो दुरुस्त है (वल्लाहु आलम) मुस्तफाद: फतावा बिननौरया

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मन्नत मानी हुई बकरी ने बच्चा जना तो उसका क्या हुकुम है

यदि किसी व्यक्ति ने बकरी की नजर मानी फिर नजर मानी हुई बकरी ने बच्चा जन्न दिया तो अब नजर में बकरी के साथ-साथ बकरी के बच्चे को भी देना लाजिम है (वल्लाहु आलम) मुस्तफाद: फतावा बिननौरया फतावा शामी पार्ट नंबर 6 पेज नंबर 323 हिदायतुल्लाह खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार HIDAYATULLAH TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA

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मन्नत के जानवर का गोश्त खुद खाना

मन्नत के जानवर का गोश्त और उससे पकाया गया खाना मन्नत मानने वाले और उसके घर वाले अर्थात मां बाप दादा दादी बेटे बेटी वगैरा और मालदार लोग नहीं खा सकते बल्कि वह खाना गरीब लोगों को खिलाना जरूरी है. (वल्लाहु आलम) मुस्तफाद: इमदादुल फतावा फतावा शामी पार्ट नंबर3 पेज नंबर 283 हिदायतुल्लाह खादिम मदरसा

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