متفرقات

این آر سی کا تلخ تجربہ

*این آر سی کا تلخ تجربہ* *محمد قمرالزماں ندوی* *مدرسہ نور الاسلام کنڈہ پرتاپگڑھ* *این آر سی* ۔ *این پی آر* اور *سی اے اے* کا خوف اور ڈر (صرف ایک خاص طبقہ کو چھوڑ کر) آج ہر ہندوستانی پر مسلط ہے، لوگ اس قانون اور بل سے اتنے خوفزدہ اور گھبرائے ہیں، کہ بلا […]

این آر سی کا تلخ تجربہ Read More »

क्या मन्नत के रोजे लगातार रखना जरूरी है

यदि किसी ने मन्नत मानी कि मेरा फुलां काम हो गया तो मैं 10 रोजे रखूंगा तो अगर उसने मन्नत मांनते वक्त लगातार रोजा रखने की नियत की थी तो उसे 10रोजे लगातार रखने होंगे और यदि उसने नियत नहीं की थी तो अलग-अलग भी रोजे रख कर के नजर पूरी की जा सकती है.

क्या मन्नत के रोजे लगातार रखना जरूरी है Read More »

قسم توڑنے کا کفارہ

قسم کا کفارہ یہ ہے کہ دس مسکینوں کو دو وقت کا کھانا کھلا دے یا دس مسکینوں میں سے ہر ایک کو صدقۃ الفطر کی مقدار کے بقدر گندم یا اس کی قیمت دے دے( یعنی پونے دو کلو گندم یا اس کی رقم )اور اگر جو دے تو اس کا دو گنا (تقریباً

قسم توڑنے کا کفارہ Read More »

कसम तोड़ने का कफ्फारा

कसम तोड़ने का कफफारा यह है कि 10 गरीबों को दो टाइम का खाना खिला दे या 10 गरीबों को एक एक जोड़ा कपड़ा पहना दे और अगर कोई ऐसा गरीब है कि ना तो खाना खिला सकता है और ना कपड़े पहना सकता है तो मुसलसल 3 रोजे रखे (वल्लाहु आलम) (मुस्तफाद: फतावा बिननौरया

कसम तोड़ने का कफ्फारा Read More »

मन्नत मांगने के बाद बकरा गुम होजाने का हुकुम

यदि किसी ने किसी काम के पूरा होने पर बकरा सदका करने की मन्नत मांनी और काम पूरा हो गया लेकिन बकरा गुम हो गया तो अब उसका हुकुम यह है कि यदि उसने बकरा मुतअययन करके उसको सबका करने की मन्नत मांनी थी और वह गुम हो गया तो अब वह मन्नत खत्म हो

मन्नत मांगने के बाद बकरा गुम होजाने का हुकुम Read More »

अल्लाह के रास्ते में रकम देने की नजर मानना और उसके खर्च करने की जगह

यदि किसी ने मन्नत मानी के यदि मेरी मुराद पूरी हो जाएगी तो मैं अल्लाह के रास्ते में उदाहरण के तौर पर ₹500 दूंगा तो यह रकम किसी जकात के रकम के हकदार शख्स को देना होगा नजर की रकम किसी मालदार को देना जायज नहीं है इसी तरह से अपने मां-बाप को अपनी औलाद

अल्लाह के रास्ते में रकम देने की नजर मानना और उसके खर्च करने की जगह Read More »

بکرے کی نذر مانی تھی لیکن غلطی سےبکری خریدی گئی تو کیا حکم ہے

اگر کسی شخص نے نذر مانی کہ اگر میرا کام ہوگیا تو میں ایک بکراذبح کروں گا لیکن جب خریدنے گیا تو غلطی سے یا جان بوجھ کر بکرا کی جگہ بکری آگئی تو کوئی حرج نہیں ہے بکری سے بھی نذر پوری ہو جائے گی۔واللہ اعلم بالصواب۔ (مستفاد: فتاوی قاسمیہ فتاویٰ بزازیہ جلد نمبر

بکرے کی نذر مانی تھی لیکن غلطی سےبکری خریدی گئی تو کیا حکم ہے Read More »

बकरे की मन्नत मानी थी लेकिन गलती से बकरी खरीदी गई तो क्या

यदि किसी व्यक्ति ने मन्नत मानी के यदि मेरा काम पूरा हो गया तो मैं एक बकरा जबह करूंगा फिर जब बकरा खरीदने गया तो गलती से या जानबूझकर बकरी ले आया तो उससे भी मन्नत पूरी हो जाएगी और बकरे की जगह बकरी को जबह करने में कोई हर्ज नहीं है (वल्लाहु आलम) (मुस्तफाद:

बकरे की मन्नत मानी थी लेकिन गलती से बकरी खरीदी गई तो क्या Read More »

सपना में मन्नत मानने का हुकुम

यदि किसी ने मन्नत मानी कि मैं उदाहरण के तौर पर अल्लाह के लिए जानवर जिबह करूंगा तो ख्वाब में मानी गई मन्नत का शरई तौर पर पूरा करना हकीकी जिंदगी में लाजिम नहीं है हां अगर वह अपने अधिकार से उसे पूरा करे या सदका करे तो दुरुस्त है (वल्लाहु आलम) मुस्तफाद: फतावा बिननौरया

सपना में मन्नत मानने का हुकुम Read More »

मन्नत मानी हुई बकरी ने बच्चा जना तो उसका क्या हुकुम है

यदि किसी व्यक्ति ने बकरी की नजर मानी फिर नजर मानी हुई बकरी ने बच्चा जन्न दिया तो अब नजर में बकरी के साथ-साथ बकरी के बच्चे को भी देना लाजिम है (वल्लाहु आलम) मुस्तफाद: फतावा बिननौरया फतावा शामी पार्ट नंबर 6 पेज नंबर 323 हिदायतुल्लाह खादिम मदरसा रशीदिया ड़ंगरा गया बिहार HIDAYATULLAH TEACHER.MADARSA RASHIDIA.DANGRA.GAYA.BIHAR.INDIA

मन्नत मानी हुई बकरी ने बच्चा जना तो उसका क्या हुकुम है Read More »

मन्नत के जानवर का गोश्त खुद खाना

मन्नत के जानवर का गोश्त और उससे पकाया गया खाना मन्नत मानने वाले और उसके घर वाले अर्थात मां बाप दादा दादी बेटे बेटी वगैरा और मालदार लोग नहीं खा सकते बल्कि वह खाना गरीब लोगों को खिलाना जरूरी है. (वल्लाहु आलम) मुस्तफाद: इमदादुल फतावा फतावा शामी पार्ट नंबर3 पेज नंबर 283 हिदायतुल्लाह खादिम मदरसा

मन्नत के जानवर का गोश्त खुद खाना Read More »

मन्नत में खैरात की रकम निश्चित नहीं की तो क्या हुकुम है

यदि किसी ने मन्नत मानी कि मेरा काम हो गया तो मैं सदका करूंगा लेकिन सदके में रकम निश्चित नहीं किया तो अगर उसके दिल में कुछ ख्याल था कि मैं इतनी रकम सदका करूंगा या इतना गल्ला सदका करूंगा तो उसी प्रकार से अदा कर दे वरना जितना एक सदकए फित्र में दिया जाता

मन्नत में खैरात की रकम निश्चित नहीं की तो क्या हुकुम है Read More »